### CC Adi 4.110

> যবে যেই ভাব উঠে প্রভুর অন্তর ।\
> সেই গীতি-শ্লোকে সুখ দেন দামোদর ॥১১০॥

> yabe yei bhāva uṭhe prabhura antara\
> sei gīti-śloke sukha dena dāmodara

*यबे*—जब; *येइ*—जो; *भाव*—भाव; *उठे*—उठता है; *प्रभुर*—भगवान् चैतन्य महाप्रभु के; *अन्तर*—हृदय में; *सेइ*—उस; *गीति*—गीत द्वारा; *श्लोके*—अथवा श्लोक द्वारा; *सुख*—सुख; *देन*—देते हैं; *दामोदर*—स्वरूप दामोदर।

**जब भी उनके हृदय में कोई विशेष भाव उठता था, तब स्वरूप दामोदर उसी प्रकार के गीत गाकर अथवा श्लोक सुनाकर उन्हें सन्तुष्ट करते थे।**
