### CC Adi 7.8

> রাসাদি-বিলাসী, ব্রজললনা-নাগর ।\
> আর যত সব দেখ, — তাঁর পরিকর ॥৮॥

> rāsādi-vilāsī, vrajalalanā-nāgara\
> āra yata saba dekha,—tāṅra parikara

*रास-आदि*—रासनृत्य; *विलासी*—भोक्ता; *व्रज-ललना*—वृन्दावन की गोपियाँ; *नागर*—नायक; *आर*—अन्य; *यत*—सभी; *सब*—सब; *देख*—जान लो; *ताङ्र*—उनके; *परिकर*—पार्षद।

**पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण रासनृत्य में परम भोक्ता हैं। वे व्रज की गोपियों के नायक हैं, और अन्य सभी मात्र उनके पार्षद हैं।**

रासादि-विलासी ("रासनृत्य के भोक्ता") शब्द अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। रासनृत्य का आनन्द केवल श्रीकृष्ण ही ले सकते हैं, क्योंकि वे वृन्दावन की गोपियों के परम नायक तथा प्रमुख हैं। अन्य सभी भक्त उनके पार्षद हैं। यद्यपि कोई भी पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण की समता नहीं कर सकता, तथापि अनेक धूर्त ठग ऐसे हैं जो श्रीकृष्ण के रासनृत्य का अनुकरण करते हैं। वे मायावादी हैं, और लोगों को उनसे सावधान रहना चाहिए। रासनृत्य केवल श्रीकृष्ण ही कर सकते हैं, अन्य कोई नहीं।
