### CC Adi 15.25

> কত দিনে প্রভু চিত্তে করিলা চিন্তন ।\
> গৃহস্থ হইলাম, এবে চাহি গৃহধর্ম ॥২৫॥

> kata dine prabhu citte karilā cintana\
> gṛhastha ha-ilāma, ebe cāhi gṛha-dharma

*कत दिने*—कुछ दिनों के पश्चात्; *प्रभु*—भगवान्; *चित्ते*—अपने मन में; *करिला*—किया; *चिन्तन*—विचार; *गृहस्थ हइलाम*—मैं गृहस्थ जीवन में रहा; *एबे*—अब; *चाहि*—मैं चाहता हूँ; *गृह-धर्म*—पारिवारिक जीवन के कार्य।

**कुछ दिनों के पश्चात् भगवान् ने विचार किया, "मैंने संन्यास ग्रहण नहीं किया, और चूँकि मैं घर में ही रह रहा हूँ, अतः गृहस्थ के रूप में आचरण करना मेरा कर्तव्य है।**
