### CC Adi 16.104

> আজি বাসা’ যাহ, কালি মিলিব আবার ।\
> শুনিব তোমার মুখে শাস্ত্রের বিচার ॥১০৪॥

> āji vāsā' yāha, kāli miliba ābāra\
> śuniba tomāra mukhe śāstrera vicāra

*आजि*—आज; *वासा'*—विश्रामस्थल; *याह*—लौट जाइए; *कालि*—कल; *मिलिब*—हम मिलेंगे; *आबार*—पुनः; *शुनिब*—मैं सुनूँगा; *तोमार मुखे*—तुम्हारे मुख से; *शास्त्रेर*—शास्त्रों पर; *विचार*—विवेचन।

**"आज आप अपने निवास लौट जाइए, और कल हम पुनः मिलेंगे, जिससे मैं तुम्हारे मुख से शास्त्रों पर विवेचन सुन सकूँ।"**
