### SB 3.11.11

> तयोः समुच्चयो मासः पितृणां तदहर्निशम् ।\
> द्वौ तावृतुः षडयनं दक्षिणं चोत्तरं दिवि ॥ ११ ॥

*तयोः*—उन दोनों का; *समुच्चयः*—समुच्चय; *मासः*—मास; *पितॄणाम्*—पितृलोकों का; *तत्*—वह (मास); *अहः-निशम्*—दिन तथा रात्रि; *द्वौ*—दो; *तौ*—मास; *ऋतुः*—एक ऋतु; *षट्*—छह; *अयनम्*—छह मास में सूर्य की गति; *दक्षिणम्*—दक्षिणी; *च*—भी; *उत्तरम्*—उत्तरी; *दिवि*—स्वर्ग में।

**दो पखवाड़ों का समुच्चय एक मास है, और वह अवधि पितृलोकों के लिए एक पूर्ण दिन-रात है। ऐसे दो मास मिलकर एक ऋतु बनाते हैं, और छह मास मिलकर दक्षिण से उत्तर की ओर सूर्य की एक पूर्ण गति बनाते हैं।**
