### SB 4.6.11

> नानामलप्रस्रवणैर्नानाकन्दरसानुभिः ।\
> रमणं विहरन्तीनां रमणैः सिद्धयोषिताम् ॥ ११ ॥

*नाना*—विविध; *अमल*—निर्मल; *प्रस्रवणैः*—झरनों सहित; *नाना*—विविध; *कन्दर*—गुफाएँ; *सानुभिः*—शिखरों सहित; *रमणम्*—आनन्ददायक; *विहरन्तीनाम्*—विहार करने वालियों का; *रमणैः*—अपने प्रियतमों के साथ; *सिद्ध-योषिताम्*—योगियों की रमणियों का।

**वहाँ अनेक झरने हैं, और पर्वतों में अनेक सुन्दर गुफाएँ हैं जिनमें योगियों की अति सुन्दर पत्नियाँ निवास करती हैं।**
