### SB 4.19.18

> तत्तस्य चाद्भुतं कर्म विचक्ष्य परमर्षयः ।\
> नामधेयं ददुस्तस्मै विजिताश्व इति प्रभो ॥ १८ ॥

*tat*—वह; *tasya*—उसके; *ca*—भी; *adbhutam*—अद्भुत; *karma*—कर्म; *vicakṣya*—देखकर; *parama-ṛṣayaḥ*—महान ऋषियों ने; *nāmadheyam*—नाम; *daduḥ*—उन्होंने प्रदान किया; *tasmai*—उसे; *vijita-aśvaḥ*—विजिताश्व (जिसने अश्व को जीत लिया); *iti*—इस प्रकार; *prabho*—हे विदुर।

**हे विदुर, जब महान ऋषियों ने राजा पृथु के पुत्र के अद्भुत पराक्रम को देखा, तब उन सबने एकमत होकर उसे विजिताश्व नाम दिया।**
