### SB 5.2.15

> रूपं तपोधन तपश्चरतां तपोघ्नंह्येतत्तु केन तपसा भवतोपलब्धम् । चर्तुं तपोऽर्हसि मया सह मित्र मह्यंकिं वा प्रसीदति स वै भवभावनो मे ॥ १५ ॥

*रूपम्*—सुन्दरता; *तपः-धन*—हे तपस्या करने वाले ऋषियों में श्रेष्ठ; *तपः चरताम्*—तपस्या तथा तप करने में संलग्न व्यक्तियों की; *तपः-घ्नम्*—जो तपस्या को नष्ट करती है; *हि*—निश्चय ही; *एतत्*—यह; *तु*—निस्सन्देह; *केन*—किस; *तपसा*—तपस्या से; *भवता*—तुम्हारे द्वारा; *उपलब्धम्*—प्राप्त हुई; *चर्तुम्*—करने के लिए; *तपः*—तपस्या; *अर्हसि*—तुम्हें चाहिए; *मया सह*—मेरे साथ; *मित्र*—हे मेरे मित्र; *मह्यम्*—मुझे; *किम् वा*—अथवा सम्भवतः; *प्रसीदति*—प्रसन्न है; *सः*—वह; *वै*—निश्चय ही; *भव-भावनः*—इस ब्रह्माण्ड के सृष्टिकर्ता; *मे*—मुझ पर।

**हे तपस्या करने वालों में श्रेष्ठ, तुमने यह अद्भुत सुन्दरता कहाँ से प्राप्त की जो दूसरों द्वारा की गई तपस्याओं को नष्ट कर देती है? तुमने यह कला कहाँ सीखी? हे मेरे मित्र, यह सुन्दरता प्राप्त करने के लिए तुमने कौन-सी तपस्या की है? मैं इच्छा करता हूँ कि तुम तपस्या तथा तप करने के लिए मेरे साथ मिल जाओ, क्योंकि सम्भवतः ब्रह्माण्ड के सृष्टिकर्ता भगवान् ब्रह्मा ने मुझ पर प्रसन्न होकर तुम्हें मेरी पत्नी बनने के लिए भेजा है।**

आग्नीध्र ने पूर्वचित्ति की अद्भुत सुन्दरता की सराहना की। वस्तुतः ऐसी अनुपम सुन्दरता देखकर वे आश्चर्यचकित हो गए, जो अवश्य ही विगत तपस्याओं तथा तपों का फल रही होगी। इसलिए उन्होंने उस कन्या से पूछा कि क्या उसने ऐसी सुन्दरता केवल दूसरों के तपों तथा तपस्याओं को भंग करने के लिए प्राप्त की है। उन्होंने सोचा कि ब्रह्माण्ड के सृष्टिकर्ता भगवान् ब्रह्मा सम्भवतः उन पर प्रसन्न हुए होंगे और इसलिए उन्होंने उसे उनकी पत्नी बनने के लिए भेजा होगा। उन्होंने पूर्वचित्ति से अपनी पत्नी बनने का अनुरोध किया ताकि वे दोनों मिलकर गृहस्थ जीवन में तपस्या तथा तप कर सकें। दूसरे शब्दों में, एक उपयुक्त पत्नी अपने पति को गृहस्थ जीवन में तपस्या तथा तप करने में सहायता करती है, यदि वे दोनों आध्यात्मिक ज्ञान के समान उन्नत स्तर पर हों। आध्यात्मिक ज्ञान के बिना पति तथा पत्नी समान रूप से स्थित नहीं हो सकते। ब्रह्माण्ड के सृष्टिकर्ता भगवान् ब्रह्मा उत्तम सन्तति में रुचि रखते हैं। इसलिए जब तक वे प्रसन्न न हों, मनुष्य को उपयुक्त पत्नी नहीं मिल सकती। वस्तुतः विवाह समारोहों में भगवान् ब्रह्मा की पूजा की जाती है। भारत में आज भी विवाह के निमन्त्रण-पत्र कार्ड के मुखपृष्ठ पर भगवान् ब्रह्मा के चित्र के साथ जारी किए जाते हैं।
